Monday, 24 July 2017

सदा मुस्कुराइये मायूसी भगाइए

        

  मनुष्य ही ऐसा सौभाग्यशाली है जिसे परमात्मा ने वरदान के रूप में मुस्कान दी है 

बुजुर्गो ने कहा है कि मनुष्य को खाना एक गुणा –पीना दो गुणा –कसरत तीन गुणा हँसाना चार गुणा और प्रभु चिंतन पांच गुणा करना चाहिए | खिला हुआ फूल – और मुस्कुराता हुआ चेहरा देख सब प्रभावित हो जाते है | लेकिन आजकल कि भागदौड़ कि जिन्दगी में मनुष्य मुस्कुराना भूल गया है जिस मुस्कान के लिए वो सब कुछ कर रहा है  , वह मुस्कान उससे दूर होती जा रही है तनाव और मायूसी के जीवन में ही वो जी रहा है | उसे मुस्कुराने कि भी फुर्सत नहीं है | कई बार कोई काम नहीं होता है या बना हुआ कोई काम बिगड़ जाता है तो तुरंत कहते हिया “पता नहीं आज सवेरे किसकी मनहूस शक्ल देखी जो आज कोई काम नहीं हो रहा है “तभी तो लोग उठते ही भगवान के दर्शन करते है कहने का भाव – मायूस चेहरा किसी को भी अच्छा नहीं लगता | कोई कोई तो उनका हालचाल पूछने पर अपनी मायूसी छिपाने के लिए आर्टिफिशियल , दिखावे के लिए हँसते है | इसलिए छोटी – छोटी बाते से मन को भरी न करे , सदा मुस्कुराइए | मुस्कराहट आपके चेहरे का दर्पण है | छोटाबच्चा भी दिन में 80 बार हँसता है परन्तु बड़े होने पर लाफिंग क्लब में जाना पड़ता है | फोटो खीचते समय भी फोटोग्राफर को बार बार कहना पड़ता है स्माइल प्लीज – जरा मुस्कुराइए | फोटो निकलने के बाद फोटो स्माइल वाली बन जाती है , निजी जिन्दगी में भी आप ऐसे ही मुस्कुराये |
                
                     मुस्कुराना इनसे सीखे 

रोने कि कोई वजह नहीं होती किसी ने कुछ कहा बात बिगड़ गई, मनमुटाव के कारण मन का रोना आ जाता हिया | जिन्दगी एक खेल कि तरह है अगर आप खेल में हार गए तो फिर भी आप मुस्कुरा सकते है , तो कहा जायेगा कि जिन्दगी के खेल में आप जित गए | इस संसार में ऐसे भी महान आत्माए होकर गई है जिनकी तस्वीरे देखकर अपने होठो पर मुस्कान आ जाती है | महात्मा गाँधी स्वामी विवेकानंद , श्री राम , श्रीकृष्ण , इनकी तस्वीरों में कभी भी मायूसी , उदासी नहीं मिलेगी | इसलिए सदा मुस्कुराये , सच्चे दिल से , निस्वार्थ भाव से निर्भयता से ताकि हमारा तन और मन स्वस्थ हो जाये | हमारे मुस्कान में सूखापन न हो सदा शुभभाव व स्नेह से भरा हुआ हो  हमारी मुस्कान सबको प्रेरणा देनेवाली हो, शक्ति प्रदान करने वाली हो सबका गम भुलाने वाली हो आशा कि नै किरण दिखनेवाली हो , उमंग उत्साह भरने वाली हो | कई बार स्वार्थ के कारण इर्ष्या के कारण भी हम मुस्कुराते है | जैसे कि शत्रु पर संकट आने पर......किसी कि हीनता पर गरीबी देखकर आदि ...यह मुस्कान चोट पहुँचाने वाली है | हमारी मुस्कान निस्वार्थ हो | हमारे मन में सभी के प्रति निर्मल भावनाए हो सरलचित हो |
               
                   आपकी मुस्कान आमूल्य है 

आपके मुस्कान कि कोई कीमत नहीं लगा सकता...... मुस्कान अमूल्य है | जैसे कोई कीमती चीज होती है तो उसे संभालकर रखते है | ऐसे ही आपकी मुस्कान उससे कई गुणा अनमोल है , आपकी निजी प्रापर्टी है | समस्याए आने पर आप इसे क्यों गवांते हो ? परिस्थिति आने पर आप बेचैन , उदास क्यों हो जाते हो ? क्या आप इतने कमजोर हो जो कोई आपकी मुस्कान आपसे छीन ले ? कदापि नहीं | इसे संभलकर रखो | आप अपना चेहरा ही मायूस क्यों बनाते हो जो कोई आपसे पूछे कि आप उदास क्यों हो ? हर पल आपकी मुस्कान बनी रहे मुस्कुराना स्वाभाविक हो जाये | दुनिया के हिसाब से भले आपके पास कुछ हो लेकिन मुस्कान मुस्कान सबसे बड़ी प्रापर्टी है | मुस्कुराने में कभी भी कंजूसी नहीं करो | तभी तो कहते है कि खुशी जैसा खजाना नहीं | कुछ भी हो जाये लेकिन खुसी व मुस्कान न जाये |
                            
                    मुस्कान भगवान का गिफ्ट है 

इस मनुष्य दुनिया में मनुष्य परमात्मा कि श्रेष्ठ रचना है | मनुष्य ही ऐसा सौभाग्यशाली है जिसे परमात्मा ने वरदान के रूप में मुस्कान दी हुई है | मुस्कान वरदान है जिससे स्वाम भी और संपर्क में आने वाले ब्यक्ति के जीवन कि कड़वाहट समाप्त हो जाती है | एक मुस्कान – हजारो कुर्बान वाली कहावत निरर्थक नहीं है उसके पीछे मनोविज्ञान का गहरा चिंतन है | मै कहूँ मुस्कुराओ तो आप मुस्कुरा सकते हो , अगर कहूँ गुस्सा करो तो नही कर सकते | गुस्सा क्यों नहीं आया क्योंकि गुस्सा करने का कोई कारण नहीं | कहा जाता है Smile goes mils आपकी खुसी दूर दूर तक खुसी के किरने  बिखेरती है | इसलिए सदा कुलकर मुस्कुराते रहो हँसते रहो |
                      
                      सदा मुस्कुराना सबसे बड़ी कला

दुनिया रंगमंच पर जितनी भी आत्माए है उन सभी में कोई न कोई विशेषताए है एवं गुणों के अधर से ही उस व्यक्ति कि पहचान होती है उसे याद किया जाता है | कई आत्माओ में मुस्कुराने कि कला विशेष होती है | मुस्कुराना तो सभी जानते है लेकिन विपरीत परिस्थितियो में बड़ी बड़ी जिम्मेवारी निभाते हुए भी सदा मुकुराना यही महँ आत्माओ कि पहचान है इसका मिसाल दादी प्रकाशमणि जी के जीवन कि एक घटना याद आती है |
             दुसरे महासम्मेलन में यू.एन. से सिस्टर शैली आई थी , जो सोचती थी कि दादी प्रकाशमणि जी तो अंतर्राष्ट्रीय संस्था कि प्रमुख है, उनसे मुलाकात तो बड़ी मुस्किल से होगी | दादी जी निर्माणता कि मूर्ति थी | सम्मलेन के सत्र के बाद रोज सबको हाथ हिलाकर मिलती थी | बहन शैली ने दादी को कहा, दादी आपके पास तीन हजार भाई-बहने मेहमान के रूप में है उनमे एक हजार तो (वी.आई.पी.) विशेष है, आपको कोई तनाव नहीं होता? दादी बोली , ये सब मेहमान अपने पिता के घर में आये है, करनकरवानहार पिता परमात्मा है, सब कुछ वही कर  रहा है,इसलिए हमें कोई तनाव नहीं | दादी ने पूछा सिस्टर शैली आपको क्या सौगात दूँ? शैली बोली , दादी जी एक सौगात मंगू, आप देंगी ? अपनी शाश्वत हंसी सौगात में दे दो | दादी ने कहा यह Godly गिफ्ट है, आपको चाहिए तो आप भी ले लो |दादी जी कितना भी व्यस्त हो हर पल सदा मुस्कुराते , सदा हलके रहते थे|  मुस्कराहट कि एक मिशाल थी दादी जी इसलिए फूल बनकर खिलते रहिये मीठी मुस्कान के साथ आगे बढिए |
                    
                        कब चली जाती है मुस्कान ?  

रोना किसी को सिखाया नहीं जाता , वह तो अपने आप आ जाता है | जन्म से ही बच्चा भी रोने लगता है | ऐसे ही बच्चा भी रोने लगता है ऐसे ही किसी ने कुछ कहा बात बिगड़ गई, मनमुटाव हुआ तनाव के कारण चेहरे पर मायूसी आ जाती है | मुस्कुराने के पल बहुत थोड़े होते है | उसमे भी कई लोग खुलके नहीं मुस्कुराते | खुले दिल से नहीं हँसते | छोटी छोटी बातो से मन भरी होने के कारण हमारी मुस्कान चली जाती है और हम मायूस हो जाते है | गम में डूब जाते है | जो हमशा ही उदास रहते है तनाव में रहते है उनके साथ बात करना भी कोई पसंद  नहीं करता , किनारा करते है | ऐसे व्यक्ति अकेला रहना पसंद करते है | इसलिए इस मायूसी के परदे को हटाइए और सदा मुस्कुराये
                
                 चेहरे कि सच्ची सुन्दरता है _ मुस्कान
 
आजकल चेहरे कि खूबसूरती के लिए क्रीम , पौडर आदि से काले को भी गोरा किया जाता है | मेकअप द्वारा आपके चेहरे कि रूपरेखा ही बदल जाती है | इसलिए ब्यूटीपार्लर में जाते है | चेहरे कि सुन्दरता बढ़ाते है लेकिन, फिर विनासी है | सुन्दरता बनी रहने के लिए रोज मेकअप करना पड़ता है | खुबसूरत चेहरे के बावजूद भी अगर मीठी मुस्कान न हो तो जैसे चेहरे कि रौनक ही चली जाती है वास्तव में चेहरे कि सच्ची सुन्दरता है – मीठी मुस्कान , जो हमारी नैचुरल ब्यूटी है इसके लिए मेकअप पर खर्चा भी नहीं करना पड़ता | आपकी मीठी मुस्कान ही चेहरे कि रौनक है मुस्कुराता चेहरा और प्रसन्नता से दमकती आंखे भला कौन प्रभावित नहीं होता ? मुस्कान से और प्रसन्न चेहरे से आपका व्यक्तित्व आकर्षक बन जाता है यही सच्ची पर्सनालिटी है |

                      नोट :- पढना और मुस्कुराना और दुसरो को भी खुश करना  यही प्रभु का सन्देश है

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Friday, 21 July 2017

एकाग्रता कि शक्ति


एकग्रता की शक्ति  

आपने कभी किसी मदारी को करता दिखाते हुए अवश्य देखा होगा | जरा सोचिये , कंधे पर लाठी रखे उसके एक सिरे पर कपडे कि गठरी में कुछ जरुरत कि चीजे कुछ का सामान बांधे पेट भरने के लिए पैदल चलता इन्सान कितनी लगन और एकाग्रता के साथ कितने समय तक जानवरों और बच्चों के साथ अपने करतब दिखने का अभ्यास करता होगा
बता बाबू जी के हाथ में क्या है |
ऐसी मेहनत, लगन एवं एकाग्रता का अनुभव मुझे ट हुआ जब कुछ वर्ष पूर्व एक चौराहे पर, एक आदमी अपने दस-बारह वर्ष के बच्चे के साथ आया | उसने उस बच्चे को जमीं पर चादर बिछाकर लेटा दिया, फिर चौकोर बड़ी टोकरी से ढक दिया, ऊपर से कई मोटे-मोटे कपडे डाल दिये | तमाशा देखने वाले लोग चारो ओर बड़ा गोल घेरा बनाकर खड़े हो गए | मदारी टोकरी में बंद बच्चे से पूछता गया , अच्छे बता, बाबूजी के हाथ में क्या है?
टोकरी में बंद बच्चा एक-एक कर सही जवाब देता गया-‘छाता घड़ी थैला , छड़ी आदि|
तमासा  देखने वालो में उसी चौराहे पर डयूटी दे रहे दो सिपाही भी शामिल हो गए| उनमे से एक सिपाही ने सोचा कि यह माद्री सभी लोगो को बेवकूफ बना रहा है, इसने ड्रम से , बच्चे को चीजो कि लिस्ट रटा राखी है, उसी क्रम में यह पुच लेता है और अच्छा आसानी से बता देता है मदारी कि इस कारगुजारी का पर्दाफाश  करने  कि नियत से सिपाही ने मदारी को बीच में रोकते हुए कहा कि तुम्हरा यह खेल झूठा है| यदि सचमुच तुम्हारा लड़का हर चीज के बारे में जनता है तो मै जो पुच रहा हूँ उसे बताये मदारी बोला हाँ बाबूजी अच्छा अवस्य बता देगा | सिपाही ने अपने हाथ में लि हुई रायफल कि ओर इशारा करते हुए कहा, अपने बच्चे से पूछो, इस रायफल का नंबर क्या है? मदारी ने कहा कि बाबूजी पहले इस रायफल का नंबर मै देखूंगा, तब यह बच्चा आपकी रायफल का नंबर बतायगा मदारी ने रायफल का नंबर देखा जो कई अंको का था| नंबर देखने के पश्चात टोकरी में बंद बच्चे को मदारी ने आवाज लगे कि बता बाबूजी कि रायफल का नंबर| बच्चे ने फटाफट रायफल का नंबर सुना  दिया| सब्भी दर्शको ने खूब तालिया बजाई शिपाही सर्मिन्दा हो गया|
                        निरंतर अभ्यास से ही एकाग्रता संभव  
प्रश्न पूछने वाला शिपाही बेचैन हो उठा कि आखिर यह सब हुआ क्या ? सभी दर्सक चले गए, मदारी भी सामान समेट कर चलने लगा|तभी उस सिपाही ने मदारी को अपने पास बुलाया सामने पड़ी बेंच पर बिठाया बगल के होटल से समोसे और चाय मंगा कर मदारी तथा उसके बच्चे को खिलाये | फिर पूंछा मेरी रायफल का नंबर इस बच्चे ने तब   बताया जब आपने उस नंबर को स्वाम देखा | आपके देखने से बच्चे को नंबर कैसे मालूम हो गया मदारी ने जवाब दिएया, एकाग्रता कि शक्ति से उसने आगे बिस्तर करते हुए बताया कि मेरे गुरूजी, जिन्होंने यह सा सिखया मुझे बताया कि एकाग्रता बहुत बड़ी शक्ति है| वह दिवार में एक गोला बनाकर कहते थे कि इस गोले को एकाग्र होकर देखो, जब इस गोले के अतिरिक्त कुछ भी दिखाई न दे तो बताना | फिर वे गोले को और छोटा करते गए और मुचे उस पर एकाग्र होकर देखने आ अभ्यास कराते रहे| धीरे-धीरे गोले के स्थान पर बिंदु बना दिया और कहा कि इस बुंडू मन को एकाग्र करो |  


Thursday, 20 July 2017

Story



                    
       मानवीय कमजोरियों को छेदने कि ताकत 
छोटे बच्चे जब स्कूल जाने लगते है अपनी पाठयपुस्तको को सरस्वती का रूप मानते है | भूल से ही पांव लग जाये तो माथे से लगा लेते है | पुस्तक ही क्यों कोई भी छपा हुआ कागज उनके लिए पुज्निये है | बड़ो के लिए भी छपाकागज सरवती तुल्य है |
अत:छपे हुए कागज का निष्पक्ष सत्य प्रेरणादायक तथा प्रेमभाव बढ़ने वाला होना जरुरी है | किसी मूल्य को सदगुण को उजागर करती हुई कोई भी छोटी सी घटना भी समाज के लोगो कि धारा बदल सकती है |साहित्य समाज का दर्पण है और दिशासूचक भी | जनकल्याण कि स्याही में डुबोकर, नम्रता और सत्यता से उकेरे गए शब्दों में मानवीय कमजोरियों को छेदने कि ताकत गोली कि मार से भी अधिक होती है | यह कलम कि ताकत ही है कि वह शान्ति के मधुर राग के साथ अपने या दुसरे के भीतर कि विक्रतियो अन्धविश्वासो, पूर्वाग्रहों, नफरतो , अशुभ भावो को खीचकर बाहर ले आती है और एक  ऐसी तड़प पैदा करती है कि व्यक्ति उनसे छुटकारा पाए बिना चैन से रह नहीं पता है |
                              पुस्तक से मिली प्रेरणा 
बात उन दिनों कि है जब मैंने हिंदी पढना अच्छे से सीख लिया था और जो भी पुस्तक मिलती उसे पढ़कर अपने आत्मविश्वास को दृढ़ कर लिया करती थी | इधर उधर पुस्तको कि खोज करने के प्रयास में एक बार घर कि रद्दी में पड़ी हुई एक पुस्तक हाथ लगी जिसका प्रारम्भ और अंत गायब था , बीच के पिन लगे कुछ पन्ने थे | उसे पढना प्रारम्भ किया तो लगा कि यह किसी देशभक्त जासूस कि कहानी है | जितना हिस्सा मेरे हाथ लगा, उसका सारांश यह था कि एक देशभक्त भारतीय जासूस पड़ोसी देश के जासूसों द्वारा पकड़ लिया गया है|उसे अंधकार बे उससे भारतीय ख़ुफ़िया ठिकानो कि जानकारी चाहते है | न बताने पर उसे भारतीय जासूस पर भरी अत्याचार करते है अत्याचार सहते-सहते जब वह कराहने लगा तो बोला, बताता हूँ यह सुनकर मारने वालो के हाथ रुक गए और चेहरे पर प्रसन्नता झलक उठी | सभी एक साथ चिल्लाए, बताओ जल्दी बताओ | देशभक्त ने थोड़ा अपने को संम्भाला फिर पूछ, बताऊँ ? उत्तर मिला, बताओ | उसन निर्भयता से कहा, तुम सब उल्लू के पट्ठे हो|
आगे क्या हुआ , मालूम नहीं, आगे के पन्ने नदारद थे पर उस देशभक्त के ये अन्तं निर्भयता भरे शब्द सुनकर मेरे शरीर में बिजली-सी दौड़ गई| उस समय आयु 9 वर्ष कि थी उस बाल अवस्था में मुझे अँधेरे से भय लगता था|
रात होने के बाद, यदि बिजली न हो तो कमरे में जाना अकेले चाट पर जाना किसी भयंकर मुसीबत में फंसने जैसा लगता था| इस अधूरी किताब ने जिन्दगी कि इस कमी को पुरा क दिया| इसको पढ़ते-पढ़ते रस्सो से बंधे, मार खाते  हुए फिर भी निर्भयता से उत्तर देते हुए देशभक्त कि तस्बीर मन पटल पर स्थिर हो गई | फटी किताब रख देने के बाद भी वह तस्वीर से हटी नहीं | इसके बाद मै अंधरे होने का बेसब्री से इंतजार करने लगी कि आज मै भी अंधरे को इसी बहादुरी से उत्तर दूंगी | रात हुई, कमरों में लाईट जलने लगी| अन्दर के स्टोर जैसे कमरे में अब भी अँधेरा था| मै दौड़कर वहां गई, कई चक्कर लगे और मन ही मन कहा, अरे अंधरे, तुम तो कुछ भी नहीं हो,तुम्हारी असलियत मै आज जन पाई| फिर मैंने लाईट जलाई और मानो तिरस्कृत अंधरे का मैंने अंतिम संस्कार कर उसका नामोनिशान भी मिटा दिया मुझे निर्भयता जैसा अमूल्य गुण देने वाला, इस पुस्तक का लेखक कौन है, मन में प्रश्न उठा पर पुस्तम का आगा-पीछा था ही नहीं, जानू कैसे? मैंने उस अनजाने लेखक को ढेरो दिल कि दुआये दी और आज भी दे रही हूँ |

Tuesday, 11 July 2017

विवेक को नष्ट करता है क्रोध



विवेक को नष्ट करता है क्रोध
संसार में करोड़पति है और रोडपति भी परन्तु उन दोनों में से उन्मादी है क्रोधपति | करोड़पति अहंकारी हो सकते है जबकि क्रोधपति परेशानियों का शिकार रहते है | यह सोचना तो करोड़पतियो का ही काम है कि करोड़ो कि सम्पति  के मालिक है या यह सम्पति उनकी मालिक | इसी तरह क्रोधपतियों को यह स्वयं विचार करना है कि क्रोध उनका पति है या वे क्रोध के? कुछ भी हो क्रोध है बुरा जिसके घर में इसका वास होता है, उसके खजाने खली हो जाते है| खजाने कौन-से ? सुख , शांति प्रेम , ख़ुशी व संतुष्टता   के| ये सर्वश्रेष्ठ खजाने है और यह क्रोध एक भयंकर भुत है जिसकी नजर इन्ही खजानों पर रहती है | अब सोच ले , आपको ये खजाने प्रिय है या आपका प्यार इस भूत से है?
निर्णय शक्ति भ्रमित
क्रोधी पापा के घर में प्रवेश करते ही बच्चे ऐसे ही दुबक जाते है जैसे बिल्ली को देखकर चुहे | यदि किसी
के घर का बड़ा व्यक्ति क्रोध कि अग्नि में जलता है तो वहां कि खुशहाली जलकर नष्ट हो जाती है |  बच्चो कि बुद्धि का विकास रुक जाता है और अनेको का जीवन उदासी व निरासा के गहन अंधेरो में डूब जाता है | क्रोध का पहला बुरा परिणाम भुगतना पड़ता है स्वयं क्रोधी को | हमें ज्ञात रहे कि क्रोध मनुष्य के विवेक को नष्ट कर देता है | क्रोध बुद्धि का परमशत्रु है, क्रोध मनुष्यों से पाप करता है और उन्हें जेल के शिकंजो में भी बंद करवा देता है | क्रोध आने से मनुष्य कि निर्णय शक्ति भ्रमित हो जाती है और वह उचित निर्णय नहीं कर पाता | यदि निर्णय ही उचित न हो तो जीवन अवश्य ही समस्याओ  के घेरे में आ जाता है |
                       मस्तिष्क में कमजोरी
सुना होगा आपने कि क्रोधी का प्रारंभ मूढ़ता से होता है और अंत पश्चाताप से | जब क्रोध प्रारंभ होता है तो बुद्धि को मूढ़ कर देता है | जा मनुष्य क्रोध कि ज्वाला में जलता है तो अपशब्दों का प्रयोग करता है और जब क्रोध शांत होता है तो पश्चाताप कि अग्नि में जलता है यह महाशत्रु क्रोध-आदि –मध्य-अंत मनुष्य को दुःख देता है | क्रोध करना पाप भी है | इससे दुसरे दुखी होते है, दुसरो कि भावनाओ को चोट पहुंचाती है यूँ भी कह सकते है इ क्रोध पाप का मूल है और पाप का अल सदैव ही बुरा होता है | क्रोध से बुद्धि का नाश होता है इसलिए जिन बच्चो को शिक्षा के क्षेत्र में प्रवीण होना है वो क्रोध का त्याग करे | माँ-बाप का भी कर्तव्य है कि वे घर में ऐसा वातावरण न बनाये जिससे बच्चो  का क्रोध व चिडचिडापन बढ़े नहीं तो इसका प्रभाव उनके भविष्य पर अवश्य होगा | यह भी सब जानते होंगे कि क्रोध से तनाव और तनाव से एसिडिटी व अल्सर होता है | क्रोध से हाई ब्लड प्रेशर होता है | क्रोध का प्रभाव मनुष्य की पाचन शक्ति को क्षीण कर देता है और मस्तिष्क को निर्बल बनता है | इसलिए भी मनुष्य को इस जहर को त्याग देना चाहिए |
अत: हे क्रोध क्रोध के पतियों , अपे क्रोध को त्यागने कि इच्छा पैदा करो | आपके बच्चे और पत्नी प्यासी नजरो से आपके घर में आने कि राह देखते है | स्वयं सोचो, जब आप क्रोध के गुबार को मन में समय घर में जाते हो तो उनकी भावनाओ पर कितना कुठाराघात होता होगा | उनकी जगह आप होते तो ....?
कई अधिकारी भी कहते है, क्रोध करना ही पड़ता है उसके बिना लोग काम नहीं करते | ठीक ई यह बात | कार्यकर्ता भी ऐसे ही है लेकिन क्या अग्नि से सब काम हो सकते है ? क्या अग्नि प्यास भी बुझा सकती है? आप अपने अन्दर स्नेह व शुभ भावनाओ कि शक्ति भरे | यह शक्ति चमत्कारिक कार्य करेगी | प्रेम का शस्त्र , क्रोध के शस्त्र से कही अधिक शक्तिशाली है
                     कामनाओ को कम करे
क्यों होता है मनुष्य क्रोध का शिकार ? निर्बल मन में क्रोध का प्रवेश होता है | जो मनुष्य ज्यादा भावुक है, उस पर क्रोध का वार होता है | जहाँ अहंकार है,  वाही क्रोध का जन्म होता है | क्रोध का मुख्य कारण है मनुष्य कि कामनाओ का पूर्ण न होना | कइयो ने क्रोध को अपना स्वाभाव  ही बना लिया है | यह एक रोग है जो आपको निर्बल करता चलेगा | याद रहे, शक्तिशाली व्यक्ति वाही है जो स्वयं पर नियंत्रण कर सके | क्रोध मुक्ति के लिए आप अपनी अनावश्यक कामनाओ को समाप्त करे | आपको ज्ञात हो कि प्रत्येक मनुष्य का सामर्थ्य अपना-अपना है | हरेक मनुष्य हमारी इच्छाओ के अनुरूप कार्य नहीं कर सकता | हमें दुसरो को भी जानने व पहचानने कि कोशिस करनी चाहिए और साथ-साथ उनकी परिस्थितियों पर भी ध्यान रखना चाहिए | इस अग्नि से बचने के लिए आप कभी भी यह न कहे कि काम ऐसा क्यों नहीं किया मुझे उसने ऐसा क्यों कहा मेरी आज्ञा क्यों नही मानी | जीवन में विभिन्न क्षेंत्र में उठने वाला यह क्यों क्रोध को जन्म देता है | जैसा मै चाहूँ वैसा ही सब करे इस विचार को जरा हल्का कर दे | अपने से पूछें कि क्या मै स्वयं सदा ही दुसरो कि कामनाओ के अनुरूप काम कर सकता हूँ | उत्तर मिलेगा, नहीं | इस समस्त विश्व में कोई भी मनुष्य सदा ही दुसरो कि कामनाओ पर खरा नहीं उतर सकता | इस सत्य को जानकर कामनाओ को कम करे तो क्रोध कम हो जायेगा |
धैर्य एक महान गुण है | धैर्य ही क्रोध कि ओषधि है | जरा ठहरे व मन को तुरंत प्रतिक्रिया करने से रोके | कुछ बोलना ही है तो एक मिनट ठहर जाये | मुझे क्रोध नहीं करना है क्योकि क्रोध व्यक्तित्य को मलीन कर देता है, क्रोध विचारो को दूषित कर देता है – यह प्रतिज्ञा कर ले | एक मास तक प्रतिदिन सवेरे उठकर अपनी प्रतिज्ञा को दोहराये , कुछ अच्छे विचार मन में लाये , तो क्रोध अवश्य ही ख़त्म हो जायेगा
           तो आओ , हम सब अपने-अपने घाव में प्रेम ख़ुशी व शांति कि सरिता बहाए | हम प्रारंभ करे क्रोध को त्यागने का तो हमें देखकर अन्य भी वैसा ही करेंगे | चाहे जितना भी ज्यादा काम हो सहज भाव से क्रोध रहित होकर करे |


                    

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